Tuesday, June 2, 2015

दिल अज़ीज़ रिश्ता

उसके सर पर गहरे घाव हैं
वो अब कुछ कुछ मुझे भूल गया है 
हथेलियां जख्मी हैं, 
उंगलियां टूटी हुई, लब चुप चुप से   
वो दामन पकड़ के रोकता है और 
न जाने की इज़ाजत देता है 
पलकों से इशारा करके  
न ही कोई उम्मीद देता है मुझे
जब वो पहली दफ़ा मिला था मुझे 
उसकी आँखों में गज़ब ख़ुशी थी 
लेकिन आज उन्हीं आँखों में बेहोशी है 
लोगों ने इस हालत में पाकर बाख़ूब लूटा है इसे 
कोई नंगा कपड़े उतार ले गया 
किसी चोर ने बटुआ मार लिया....... 

शरीर पथराया हुआ सा है उसका 
मगर उसे छूकर महसूस किया है मैंने 
कुछ जान है जो अब भी बाकी है 
सच बहुत मारा है हालात और वक़्त ने 
अपने कटीले चाबुक से मासूम को 
कि देखो आज हमारा दिल अज़ीज़ रिश्ता 
हॉस्पिटल के आई. सी. यू. में भर्ती है। 
 _________________

© परी ऍम. 'श्लोक'  

11 comments:

  1. जाने अंजाने सारी सहनशक्ति हृदय से ही उम्मीद की जाते है और वो इसे हस्ते हस्ते सहने मे पारंगत है शायद , अच्छे जज़्बात बधाई

    ReplyDelete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बृहस्पतिवार (04-06-2015) को "हम भारतीयों का डी एन ए - दिल का अजीब रिश्ता" (चर्चा अंक-1996) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    ReplyDelete
  3. शरीर पथराया हुआ सा है उसका
    मगर उसे छूकर महसूस किया है मैंने
    कुछ जान है जो अब भी बाकी है
    सच बहुत मारा है हालात और वक़्त ने
    अपने कटीले चाबुक से मासूम को
    कि देखो आज हमारा दिल अज़ीज़ रिश्ता
    हॉस्पिटल के आई. सी. यू. में भर्ती है।


    भावनाओं और रिश्तों के समंदर में हिचकोले लेती जिंदगी को बखूबी बयान किया है आपने परी जी !

    ReplyDelete
  4. बहुत ही मार्मिक चित्रण

    ReplyDelete
  5. बहुत खूब !!!

    "जब वो पहली दफ़ा मिला था मुझे
    उसकी आँखों में गज़ब ख़ुशी थी
    लेकिन आज उन्हीं आँखों में बेहोशी है
    लोगों ने इस हालत में पाकर बाख़ूब लूटा है इसे"....एक मर्म स्पर्श !!!

    ReplyDelete
  6. सुन्दर व सार्थक प्रस्तुति..
    शुभकामनाएँ।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    ReplyDelete
  7. भावनाओं के समुद्र में बहती सुन्दर रचना |

    ReplyDelete
  8. सत्य कभी-कभी मार्मिक भी होता है.

    ReplyDelete
  9. लाजवाब प्रस्तुति।
    .
    सादर

    ReplyDelete
  10. मार्मिक रचना

    ReplyDelete

मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन का स्वागत ... आपकी टिप्पणी मेरे लिए मार्गदर्शक व उत्साहवर्धक है आपसे अनुरोध है रचना पढ़ने के उपरान्त आप अपनी टिप्पणी दे किन्तु पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ..आभार !!