Wednesday, January 14, 2015

"शहर का मौसम"


धूप है
न झड़ी ओस की

दिन के जिस्म से उठता हुआ
धुँआ भी नहीं

बर्फ की बौछार है
न रूखापन फ़ज़ाओं में

निगाहों के आस-पास
हरा-भरा है मंज़र

काले दुपट्टे से
कुछ बूँदें टपक रही है

गुलाबी जमीन
और भी गुलाबी हो गयी है

हवाओ का तन भीगा-भीगा सा है
 
आज मेरे शहर का मौसम गीला सा है
 
________________
© परी ऍम. 'श्लोक'

22 comments:

  1. बहुत सुन्दर . मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं !
    नई पोस्ट : गुमशुदा बौद्ध तीर्थ

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  2. गरारा मौसम का आज ढीला हो गया
    सर्द मौसम भी बेहद रंगीला हो गया
    ये कुदरत भी नाय़ाब करिश्मा है दोस्तों
    के देखते ही देखते शहर गीला हो गया

    अज़ीज़ जौनपुरी

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  3. वाह परी जी वाह ...जिस नजाकत से आप ने बयां किया है शहर का मौसम ...बहुत सुंदर

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  4. बहुत सुन्दर ............आज मेरे शहर का मौसम गीला सा है

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  5. भीगता भी कैसे मन तो पहले से गीला हुआ है।
    सर्द रचना।

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  6. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 15-01-2015 को चर्चा मंच पर दोगलापन सबसे बुरा है ( चर्चा - 1859 ) में दिया गया है ।
    धन्यवाद

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  7. वाह ! बहुत ही भीगा भीगा सा मौसम है और भीगी भीगी सी आपकी रचना है जो हमें भी भिगो गयी ! बहुत सुन्दर !

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  8. बहुत बढ़िया परी जी


    सादर

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  9. आ हा गजब....

    'मतलब कि मौसम परी सा हुआ है'

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  10. काले दुपट्टे से
    कुछ बूँदें टपक रही है
    गुलाबी जमीन
    और भी गुलाबी हो गयी है-----
    मन को मसोसता महीन अहसास
    मन को छूती अभिव्यक्ति -----

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  11. बहुत बढ़िया ...
    मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  12. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    मकर संक्रान्ति की शुभकामनायें

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  13. शहर प्रेम की नमी में डूबा है ... इसलिए गीला है ... बहुत खूब लिखा है ...

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  14. बेहद भावनात्मक रचना है ।बहुत सुन्दर

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  15. बेहद भावनात्मक रचना है ।बहुत सुन्दर

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  16. बहुत ही भीगा भीगा सा मौसम है

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  17. बर्फ की बौछार है
    न रूखापन फ़ज़ाओं में

    निगाहों के आस-पास
    हरा-भरा है मंज़र

    काले दुपट्टे से
    कुछ बूँदें टपक रही है
    बेहद भावनात्मक रचना है ।बहुत सुन्दर

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  18. वाह आज मेरे शहर का मौसम गीला सा 1....बहुत सिंदर !!

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