Saturday, November 1, 2014

ऐसे में लोग ..


 
पागल
हो जाने का
गज़ब फायदा है
ऐसे में लोग
पत्थर तो उठाते हैं
मगर
ऊँगली नहीं... !!

_____________________
© परी ऍम 'श्लोक'

17 comments:

  1. सही कहा है...तन अवश्य घायल हो जाता है पर मन पर चोट नहीं लगती....

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  2. हा हा हा हा.... पागल तब होइये जब कोई मिल जाये खास....आपकी देखरेख करने वाला.... :)

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  3. दुनिया खुद एक पागल खाना है। यहां लोगों के हाथ में सिर्फ पथ्थर ही तो हैं।

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  4. जिसके लिये पागल हुए वोह जान पाये कि पत्थर खा रहे है..... तब तो वाजिब है ख्याल

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (03-11-2014) को "अपनी मूर्खता पर भी होता है फख्र" (चर्चा मंच-1786) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. बहुत ही अच्छा

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  7. परी जी ,पत्थर खाने के लिए नहीं है नारी देह ,न संवेदनशील मन पागल होने के लिए. हाथ में पत्थर उठा लेने वाला पागलपन हो तो अच्छा !

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  8. Parri ji your pen always offers some thing special.

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  9. वाह ... कितनी गहरी बात कह दी ...

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  10. शायद इसे ही कहते है गागर मे सागर भरना ।

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  11. बहुत गहरी बात,,
    सुन्दर...

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  12. क्या बात कही है !! आप तो लोगों को पागल होने के लिए प्रेरित कर रहे हो परी जी , हहहाआआआआ ! just kidding

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  13. बिलकुल सही अवलोकन एवं विवेचन !

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  14. hmmm pathhar lagne se tan ghayal ho jata h sirf kuch hi samay k liepr ungli uthne se jindagi ghayal ho jati h

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  15. hmmm sach h patthar lagne se tan kuch der k liye ghayal hota h aur ungli uthne se jindagi ghayal ho jati h

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