Tuesday, September 16, 2014

मत भूलो .... हिन्दी हैं हम

हिन्दी कि छिपन-छिपायी है
अंग्रेजी की पकड़न-पकड़ाई है
मिले उसी को नौकरी
जिसने अंग्रेजी में कथा सुनाई है

थैंक्यू जुबान पर है रटा हुआ..
धन्यवाद शब्द है घटा हुआ
हर कोई हिन्दी भाषा-भाषी से
लगता है बहुत कटा हुआ

मुझको है अगर ज्ञान बड़ा
तो भी है सब बेकार पड़ा
अंग्रेजी अगर मैं न बोलूं
सुन लेता हूँ की अनपढ़ भाई हैं

जब मैं अंग्रेजी बोला तो
दादी-मम्मी दोनों मुस्कुराई है
पापा बोले लगता है कि
बेटा कर रहा अच्छी पढ़ाई है

मैं भी भूला और तू भी भूला
कि हम सब भारतवासी हैं
पश्चिमी सभ्यता कि चमक से
यूँ आँखे सब कि चौंधियाई हैं

उन्हें याद नहीं अनमोल है कितनी
हिन्दी अपनी माता है
उठा कर देखो पढ़ो इतिहास
हिन्दी कि गाता गौरवगाथा है

भला ऐसा कोई बेटा क्या
माता को झुठलाता है
हिन्दी से तोड़कर नाता
अंग्रेजी को बुआ बनाता है

चलो उठो और सपूत बनो
भारतवासी साबूत बनो

हिन्दी कि शब्दावली है व्यापक
हिन्दी का विस्तार करो
हिन्दी गाओ ..हिन्दी बोलो ...
हिन्दी बनकर अभिमान करो

हिन्दी हैं हम ..हिन्दी हैं हम ...
हिन्दी का सम्मान करो
हिन्दी लिखो ...हिन्दी पढ़ो ...
हिन्दी का गुणगान करो......................

______परी ऍम 'श्लोक'

6 comments:

  1. हिन्दी भाषा के प्रति अगाध प्रेम प्रकट करती आपकी कविता को पढ़कर मन गदगद हो गया। 'बधाई' एक अच्छी भावमयी कविता पढ़वाने के लिए।

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  2. बहुत बढ़िया परी जी


    सादर

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  3. बहुत अच्छी और सार्थक रचना..

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  4. अच्छी और सार्थक रचना

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