Wednesday, September 10, 2014

"संगम"


तुम बिन

कैसा चार... धाम ?
और
कैसा गंगा-यमुना का नहान ..
 
मिल जाएँ जहाँ
मैं _तुम
और
प्रेम .....

प्रियतम

मेरा वहीं है
संगम स्थान  !!


_____परी ऍम 'श्लोक'

1 comment:

  1. बड़ा सुन्दर सच कह दिया आपने !

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