Sunday, July 20, 2014

बार-बार इश्क़ की दुहाई न दीजिये.....

बार-बार इश्क़ की दुहाई न दीजिये..
इतनी भी खूबसूरत बेवफाई न कीजिये...

नज़रो के लव्ज़ ही काफी हैं पढ़ने को 'श्लोक' ..
लबो को तकल्लुफ देकर गवाही न दीजिये..

काटे से भी न कटे दर्द का शज़र कभी ..
ऐसे तो दिल की मिटटी में बिवाई न कीजिये ..

लिखावट मेरे अहसासों की सबको खबर पड़े ..
इतनी भी गाढ़ी कलम की रोशनाई न कीजिये ..

हिस्सा जो रोशन है चाहत का रोशन रहने दो ..
आंधियो के तौफे में तो ये कमाई न दीजिये ..


------------------परी ऍम 'श्लोक'

5 comments:

मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन का स्वागत ... आपकी टिप्पणी मेरे लिए मार्गदर्शक व उत्साहवर्धक है आपसे अनुरोध है रचना पढ़ने के उपरान्त आप अपनी टिप्पणी दे किन्तु पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ..आभार !!