Wednesday, August 20, 2014

जान लो .....

जान लो
ये हकीकत
अक्सर
बेपर्दा रहे तो अच्छा है

तुम्हारी जिंदगी के
चूल्हे में  
मेरे वज़ूद का
ईंधन जलता है
और
उस पर सेंकती हूँ
मैं चाहतो की रोटी
आस का मक्खन लगा के
वक़्त को
चखाती रहती हूँ

ताकि वक़्त मेरी
चाहत की मांग करे
और
मेरी चाहत
तुम्हारे लिए
फिर कभी न ख़त्म न होने वाला
सिलसिला बन जाए !!



______________परी ऍम 'श्लोक'

3 comments:

  1. तुम्हारी जिंदगी के
    चूल्हे में
    मेरे वज़ूद का
    ईंधन जलता है
    और
    उस पर सेंकती हूँ
    मैं चाहतो की रोटी
    आस का मक्खन लगा के
    वक़्त को
    चखाती रहती हूँ

    क्या बात है

    ReplyDelete

मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन का स्वागत ... आपकी टिप्पणी मेरे लिए मार्गदर्शक व उत्साहवर्धक है आपसे अनुरोध है रचना पढ़ने के उपरान्त आप अपनी टिप्पणी दे किन्तु पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ..आभार !!