Saturday, August 9, 2014

समझौता सदैव स्त्री ही करती है !

पुरुष हमेशा
देह चाहता है....

स्त्री प्रेम

और फिर

समर्पण
हो या
समझौता

सदैव
स्त्री ही करती है !



____________परी ऍम श्लोक

19 comments:

  1. असहमत हूँ मैं शब्द "सदैव" से...

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  2. आप तो ऐसे कह रही है जैसे स्त्री विदेह होती है …
    ध्यान रहे-जरूरत का हक़दार हर कोई है …
    और ये क्या बात हुई कि.…
    स्त्रियों को कमजोरी का तमगा पहनाया जाय.…
    और पुरुषों को ग़लत-अंदाज़ समझा जाय.…
    बड़ी चीज़ है -हिम्मत … जो सबमें होना चाहिये ……
    आख़िरकार जिसमें भी हिम्मत की कमी हुई …
    उसने कब प्रतिकूलता को चुनौती माना है …
    उसने तो हरदम समझौता ही उचित माना है …
    ....... मुझे तो यही लगता है कि प्रतिकूलता को चुनौती समझना पुरुषों की
    और उससे समझौता करना स्त्रियों की लगभग स्थायी प्रवृत्ति है ……

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  3. सत्य वचन


    सादर

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  4. गहरी अर्थपूर्ण ... कुछ हद तक सत्य कहती ..

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  5. सटीक .....बहुत सुंदर विचार

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  6. Aisa Hamesha satya nahi mana ja sakata.

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  7. काम शब्दों में खूब कहा .... कटु , पर सत्य यही है

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  8. कल 12/अगस्त/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  9. par jyadatar smay me stya aisa hi hota hai...

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  10. tippani ke liye shukriyaa pradeep ji....

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  11. अधिकतर समय ऐसा होता है पर पुरुष भी समझौता करते हैं | जीवन में समझौता बहुत जरुरी है |
    अनुभूति : ईश्वर कौन है ?मोक्ष क्या है ?क्या पुनर्जन्म होता है ?
    मेघ आया देर से ......

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  12. बहुत सुंदर विचार...कुछ हद तक सत्य कहती...

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