Saturday, October 11, 2014

नेक कर्म...मीठा फल


कोशिश वही
कामयाब होती है
जिसकी नेक सोच से
शुरुआत होती हैं

नेक कर्म
मीठा फल पाता है
बेशक थोड़ा वक़्त लगे
पर सही समय ज़रूर आता है

तुमने बचपन बचाया
कितने बच्चो का उद्धार किया
उच्च स्तर की सुख-सुविधाओ को
इस मकसद के खातिर त्याग दिया  
देखो ..
तुमने भी तो पाया
कितने बेबसों के
आशीषों ने तुम्हे
नोबेल पुरस्कार दिलाया

यह सबको देता  हैं  सन्देश
बस नेक सोच सूझ-बूझ के साथ
बढ़ते रहो....निष्पक्ष रहो
रास्ते मुश्किल से मुश्किल भी खुलेंगे
हौसले गर जिन्दा है
तो मौके और भी मिलेंगे
 
तुम भी तो
शिक्षा के लिए लड़ी
मौत को भी मात दिया
तुम्हारे ज़ज़्बों के जिंदादिली ने
तुम्हे सम्मान में शांति पुरस्कार दिया !!


_______  © परी ऍम 'श्लोक'

14 comments:

  1. पुरस्कार और उपहार पाना दोनों ही सुखद होते हैं।
    शान्ति के नोबल पुरस्कार की सूचना हर बार मुझे ऐसी लगती है जैसे कोई किसी को उपहार दे रहा हो।
    - कैलाश जी ने ८० हज़ार बचपन को बचाया और अपने दूसरे प्रयास में उपहारस्वरूप अपना बुढ़ापा बचाया ।
    - अब शान्ति के दूत अमेरिका के बाद पाकिस्तान से भी मिलने लगे हैं। मलाला जी के चयन का आधार हास्यास्पद लगा। [हास्योक्ति - नाम में दो बार ला ला आ जाने से कहीं उपहार का जरूरतमंद पात्र तो नहीं समझ लिया गया। ] चलो अच्छा है यह पुरस्कार अपना अवमूल्यन स्वयं करने में लगा है। मुझे लगता है एक समय बाद इसके विकल्प में एक नए पुरस्कार की दरकार होगी।

    ReplyDelete
  2. पाकिस्तान में भी शांति कायम रखने के पक्ष में कुछ लोग जीवित है।
    हां जरुर ये बधाई के पात्र हैं।
    उम्दा लेखन

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, रविवार, दिनांक :- 12/10/2014 को "अनुवादित मन” चर्चा मंच:1764 पर.

    ReplyDelete
  4. हौसले गर जिन्दा है तो मौके और भी मिलेंगे ।।
    सही कहा आपने । ये हौसले ही थे कि हर दिन मौत को करीब देख भी वो नन्ही बच्ची विजयपथ पर चलती रही ।
    साधुवाद अपनी लेखनी से आपने जो इन्हें सम्मान दिया ।

    ReplyDelete
  5. अपनी कविता के माध्यम से आपने सुंदर बधाई दी है

    ReplyDelete
  6. एक तरफ ८० हजार बच्चों को नया रास्ता दिखाया दुसरे तरफ बालिकाओं के लिये नया रास्ता का आगाज़ किया ---दोनों अतुलनीय कर्म है ! यथोचित सम्मान मिला ! बधाई |सुन्दर रचना !
    साजन नखलिस्तान

    ReplyDelete
  7. बधाई देने की नई भंगिमा -बढ़िया रही !

    ReplyDelete
  8. पुरुस्कार पाने वालों को बधाई और आप को बधाई सुन्दर रचना के लिये

    ReplyDelete
  9. सुंदर प्रस्तुति... 2014 का नोबेल शांति पुरस्कार भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को संयुक्त रूप से मिलना पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के लिए गर्व की बात है. यह घोषणा ऐसे वक्त में हुई है जब दोनों देशों की सीमा पर भारी तनाव है. कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई के प्रयासों को सलाम...यह उनकी सच्ची लगन और कोशिशों से ही मुमकिन हुआ है..

    ReplyDelete
  10. बधाई दोनों को ... हालांकि कई बार राजनीति हो जाती है इस पुरूस्कार पर ...

    ReplyDelete
  11. हार्दिक बधाई आदरणीय सत्यर्थी जी एवं प्रिय मलाला को।

    सादर

    ReplyDelete
  12. तुमने बचपन बचाया
    कितने बच्चो का उद्धार किया
    उच्च स्तर की सुख-सुविधाओ को
    इस मकसद के खातिर त्याग दिया
    देखो ..
    तुमने भी तो पाया
    कितने बेबसों के
    आशीषों ने तुम्हे
    नोबेल पुरस्कार दिलाया

    ​हार्दिक बधाई

    ReplyDelete
  13. पुरस्कार नई पीढ़ी को एक संदेश देते हैं --- बहुत सार्थक लिखा --
    सादर ---

    ReplyDelete

मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन का स्वागत ... आपकी टिप्पणी मेरे लिए मार्गदर्शक व उत्साहवर्धक है आपसे अनुरोध है रचना पढ़ने के उपरान्त आप अपनी टिप्पणी दे किन्तु पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ..आभार !!