Friday, October 17, 2014

चलो ले चलूँ मैं तुम्हे ...!!


चलो ले चलूँ मैं तुम्हे
दूर कहीं.......

उन घनी वादियों में  
सूरज कि तपन से
पेड़ कि छाँव में
इस ज़मी से उस फलक तक
चाँद कि चमक तक

 
चलो ले चलूँ मैं तुम्हे...
खुशियो की बारात हो जहाँ
हँसी का संगीत हो
जहाँ स्नेह की चादर हो
सकून का बिस्तर हो
जहाँ मैं हूँ और बस तुम हो
संग तेरी प्रीत हो

 
चलो ले चलूँ में तुम्हे ..
जहाँ दरमियान न तूफ़ान हो
जिस तरफ भी देखूं
तेरा चेहरा ही आइना हो
जहाँ जुदाई का न नाम हो
प्यार से हर काम हो 
 
बस यही मेरी आरज़ू है
क्या तेरी आरज़ू है ?

आओ !
हर बुरी नज़र से छिपाकर
अपने दिल में बसाकर 
यहाँ से दूर कहीं.......

चलो ले चलूँ मैं तुम्हे !!

 __________________
© परी ऍम 'श्लोक'

11 comments:

  1. बहुत खूब ... दिल में बसा कर तो ऐसे भी कहीं ले जाएँ ...
    लाजवाब ख्याल ...

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  2. बहुत ही बढ़िया

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  3. बेहद कोमल खयालात और जीवंत अभिव्यक्ति ! अति सुन्दर !

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  4. सुन्दर रचना रची है आप ने

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  5. Aap sabhi se niranttar milati in utsaahvardhak tipnniyo ke liye tahe dil se aabhaari hun .... Behad shukriyaa :)

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  6. बहुत ख़ूब..

    जहाँ मैं हूँ और बस तुम हो
    संग तेरी प्रीत हो....

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  7. बहुत खूब !
    कृपया मेरे ब्लॉग पर आएं !

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  8. बाह क्या बात है परी जी बहुत खूव
    चलो ले चलूँ मैं तुम्हे...
    खुशियो की बारात हो जहाँ
    हँसी का संगीत हो
    जहाँ स्नेह की चादर हो
    सकून का बिस्तर हो
    जहाँ मैं हूँ और बस तुम हो
    संग तेरी प्रीत हो

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  9. चलो ले चलूँ में तुम्हे ..
    जहाँ दरमियान न तूफ़ान हो
    जिस तरफ भी देखूं
    तेरा चेहरा ही आइना हो
    जहाँ जुदाई का न नाम हो
    प्यार से हर काम हो
    बहुत सुन्दर

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