मैं जीवन कि रणभूमि में हूँ
रिश्तो के चक्रव्हीव् से घिरी हुई
भावनाओ के तीरो से लदी हुई
प्रेम के सारथि के साथ खड़ी हुई
यहाँ हर साधन मौजूद हैं
साम-दाम-दंड-भेद...
जीत कि इस आपसी होड़ में
अपनी चूके निशाने को सही दिशा देती हुई
छल-कपटों के मध्यस्त घायल अवस्था में
बिना विश्वास पात्र सैनिक के अकेली
निरंतर जीवन युद्ध लड़ रही हूँ..
रचनाकार : परी ऍम 'श्लोक'
रिश्तो के चक्रव्हीव् से घिरी हुई
भावनाओ के तीरो से लदी हुई
प्रेम के सारथि के साथ खड़ी हुई
यहाँ हर साधन मौजूद हैं
साम-दाम-दंड-भेद...
जीत कि इस आपसी होड़ में
अपनी चूके निशाने को सही दिशा देती हुई
छल-कपटों के मध्यस्त घायल अवस्था में
बिना विश्वास पात्र सैनिक के अकेली
निरंतर जीवन युद्ध लड़ रही हूँ..
Dated : 3/1/2014…
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